हाल के दिनों में बैंक एफडी पर ब्याज की दरों में भारी गिरावट आई है। ज्यादातर बड़े बैंक फिलहाल एफडी पर दीर्घकाल की अवधि में भी 6 से 7 फीसदी के करीब ही ब्याज दे रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद कई लोग, खासकर पारंपरिक निवेशक अब भी बैंक एफडी में ही निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह केवल इन दो वजहों से कि एक तो इनमें फिक्स्ड रिटर्न मिलता है और दूसरा, ये अपेक्षाकृत काफी सुरक्षित मानी जाती हैं। लेकिन ये दोनों ही विशेषताएं सरकारी बॉन्ड (आरबीआई सेविंग बॉन्ड) में भी उपलब्ध हैं, वह भी ज्यादा रिटर्न के साथ। पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट अजीत कुमार बताते हैं कि सरकार द्वारा जारी होने के कारण ये बॉन्ड बेहद सुरक्षित भी होते हैं। इन पर फिक्स्ड 7.75 फीसदी का सालाना ब्याज मिलता है, जो मौजूदा समय में अधिकांश बैंक की एफडी पर ब्याज से अधिक है।
आरबीआई सेविंग बॉन्ड से जुड़ी खास बातें...
क्या है आरबीआई सेविंग बॉन्ड?
आरबीआई की तरफ से सभी सरकारी बैंक, तीन बड़े निजी बैंक- एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक व एक्सिस बैंक और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआइएल) इस बॉन्ड को जारी करते हैं। वर्ष के दौरान कभी भी इस बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है। इस बॉन्ड को सिर्फ डीमैट फॉर्म में जारी किया जाता है। हालांकि बॉन्ड में निवेश के लिए आप अप्लाई ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी तरीके से कर सकते हैं। ये बॉन्ड व्यक्तिगत के साथ-साथ अपनी पत्नी या पति के साथ संयुक्त रूप से भी खरीदा जा सकता है। यहां तक कि आप अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर भी ये सेविंग बॉन्ड खरीद सकते हैं।
क्या है निवेश की सीमा और लॉक-इन पीरियड?
इसमें न्यूनतम 1000 रुपए की राशि से निवेश किया जा सकता हैै। इसके बाद आपको 1000 रुपए के गुणक में ही निवेश करना होगा, यानी दो हजार, तीन हजार, पांच हजार आदि। जबकि अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।
बॉन्ड का लॉक-इन पीरियड (मैच्योरिटी) इसके जारी होने की तारीख से सात साल है। सात साल से पहले आप इस बॉन्ड को रिडीम नहीं कर सकते। 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों को प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की सुविधा है। नियमों के अनुसार 60 से 70 साल के निवेशक 6 वर्ष के बाद, 70 से 80 साल के निवेशक 5 वर्ष के बाद, जबकि 80 साल से ऊपर के निवेशक 4 वर्ष के बाद प्रीमैच्योर रिडेम्पशन कर सकते हैं। लेकिन प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर पेनाल्टी का भी प्रावधान किया गया है। पेनाल्टी के रूप में होल्डिंग पीरियड के अंतिम छह महीने के लिए देय बकाया ब्याज का 50 फीसदी वसूला जाता है।कितना मिलेगा ब्याज?
इस बॉन्ड पर निवेशकों को फिक्स्ड 7.75 फीसदी ब्याज मिलता है। ये बॉन्ड दो तरह के होते हैं- क्युमुलेटिव और नॉन-क्युमुलेटिव। क्युमुलेटिव बॉन्ड पर ब्याज मैच्योरिटी की रकम के साथ मिलता है, जबकि नॉन-क्युमुलेटिव बॉन्ड पर ब्याज हर छह महीने पर मिलता है। क्युमुलेटिव ऑप्शन पर न्यूनतम 1000 रुपए के निवेश पर आपको मैच्योरिटी के बाद 1,703 रुपए मिलेंगे। अगर आप नॉन-क्युमुलेटिव ऑप्शन लेते हैं तो 1000 रुपए के निवेश पर हर छह माह में आपको 38.75 रुपए का रिटर्न मिलेगा। यह रिटर्न हर साल 1 फरवरी और 1 अगस्त को मिलेगा।
क्या हैं टैक्स के प्रावधान?
इस सेविंग बॉन्ड पर न जो जमा करने पर और न ही इससे अर्जित रिटर्न पर टैक्स की छूट का प्रावधान है। ब्याज यानी रिटर्न की रकम निवेशक की इनकम में जोड़ दी जाती है और निवेशक को उसके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होता है। इस बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस का भी प्रावधान है, जो 10 फीसदी रहता है। लेकिन टीडीएस तभी कटेगा, जब मिलने वाला रिटर्न एक वित्त वर्ष में 10 हजार रुपए से ज्यादा होगा।
लिक्विडिटी की सुविधा है?
इस बॉन्ड की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज पर नहीं हो सकती। इस बॉन्ड को ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकता। साथ ही इस बॉन्ड को लोन लेने के लिए कोलैटरल/सिक्योरिटी की तरह इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता। यानी इसके साथ लिक्विडिटी की सुविधा नहीं है। यह इसका नकारात्मक पक्ष है।
किनके लिए बेहतर विकल्प?
वैसे निवेशक जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपए से कम है, साथ ही जिन्हें सात वर्ष तक निवेश करने में कोई दिक्कत नहीं है, उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प है।
आरबीआई की तरफ से सभी सरकारी बैंक, तीन बड़े निजी बैंक- एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक व एक्सिस बैंक और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआइएल) इस बॉन्ड को जारी करते हैं। वर्ष के दौरान कभी भी इस बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है। इस बॉन्ड को सिर्फ डीमैट फॉर्म में जारी किया जाता है। हालांकि बॉन्ड में निवेश के लिए आप अप्लाई ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी तरीके से कर सकते हैं। ये बॉन्ड व्यक्तिगत के साथ-साथ अपनी पत्नी या पति के साथ संयुक्त रूप से भी खरीदा जा सकता है। यहां तक कि आप अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर भी ये सेविंग बॉन्ड खरीद सकते हैं।