पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत में पेमेंट करने के तौर-तरीको में काफी बदलाव देखने को मिला है। फिर चाहे क्यूआर कोड से पेमेंट करने की बात हो या हाल में आई कॉन्टैक्टलेस कार्ड्स की टेक्नोलॉजी। समय के साथ रुपयों का लेनदेन और भी आसान हुआ है। कॉन्टैक्टलेस क्रेडिट कार्ड अब धीरे-धीरे मैग्नेटिक स्ट्रिप और चिप वाले कार्ड की जगह ले रहे हैं। कॉन्टैक्टलेस क्रेडिट कार्ड में दो तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है - ‘नियर फील्ड कम्युनिकेशन’ और ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (आरएफआईडी)। जब इस तरह के कार्ड को इस तकनीक से लैस कार्ड मशीन के पास लाया जाता है, तो पेमेंट अपने-आप हो जाता है। मशीन की 2 से 5 सेंटीमीटर की रेंज में भी कार्ड को रखा जाए तो पेमेंट हो सकता है। इससे कार्ड को किसी मशीन में डालने या उसे स्वाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती। न ही पिन या ओटीपी डालने की जरूरत होती है। कॉन्टैक्टलेस पेमेंट की अधिकतम सीमा 2,000 रुपए होती है। इससे ज्यादा राशि के पेमेंट के लिए पिन डालने या ओटीपी की जरूरत होती है।
सावधान नहीं रहेंगे तो 2000 रुपए की चपत लगने की आशंका रहेगी
हर नई टेक्नोलॉजी की तरह, इसके भी काफी फायदे और नुकसान हैं। फायदा यह कि यह पेमेंट का एक आसान, तेज और सुरक्षित माध्यम है, क्योंकि पेमेंट की जानकारी पर बहुत सारी सिक्युरिटी लेयर्स होती हैं जिससे इसका गलत इस्तेमाल नहीं हो सकता। नुकसान की बात करें तो इस तरह के कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए संभव है वॉलेट में रखे कार्ड से भुगतान हो जाने की जानकारी खुद कार्डधारक को ना हो। बाद में उसे पेमेंट हो जाने का पता चले। धोखाधड़ी करने वाला इंसान कार्ड स्वाइप मशीन को किसी भीड़भाड़ वाली जगह में आपकी जेब में रखे वॉलेट के पास लाकर 2,000 तक की राशि आपके कार्ड से निकाल सकता है वह भी आपकी जानकारी के बिना। इसलिए कॉन्टैक्टलेस कार्ड को सुरक्षित स्थान पर रखना आवश्यक है।
इस तरह के कार्ड के मौजूदा स्वरूप में जोखिम ज्यादा हैं और फायदे कम
कॉन्टैक्टलैस कार्ड का कोई गलत इस्तेमाल न कर सके, इसके लिए बाजार में ऐसे कई कार्ड-होल्डर उपलब्ध हैं जो आरएफआईडी को ब्लॉक करते हैं। यदि आप कॉन्टैक्टलेस कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो इन्हें ऐसे कवर्स में रखने में ही अधिक समझदारी होगी। इन कार्ड की एक और खामी यह है कि कॉन्टैक्टलैस कार्ड भारत में सब जगह आसानी से स्वीकार नहीं किए जाते हैं और न ही सभी बैंक ये कार्ड अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं। अर्थव्यवस्था के अंतिम छोर तक इस तकनीक के पहुंचने में अभी समय है। आने वाले समय में इसका विस्तार होगा। लेकिन मौजूदा स्वरूप में कॉन्टैक्टलैस कार्ड इस्तेमाल करने में जोखिम ज्यादा हैं और फायदे कम। भविष्य में जैसे-जैसे कॉन्टैक्टलेस कार्ड का चलन बढ़ेगा, वैसे-वैसे इस तकनीक और सुरक्षित बनाने के लिए बाजार में आरएफआईडी ब्लॉक करने वाले कार्ड-होल्डर की मांग भी बढ़ेगी।